PoK में बड़ा बवाल: पाकिस्तानी सेना की फायरिंग में 9 लोगों की मौत, भारत ने कहा- व्यवस्थित शोषण का नतीजा
Pakistan Occupied Kashmir Protests
नई दिल्ली: Pakistan Occupied Kashmir Protests: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में एक प्रतिबंधित प्रदर्शनकारी समूह के समर्थकों और सुरक्षा बलों के बीच नई झड़पों में नौ लोग मारे गए और एक दर्जन घायल हो गए. जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दलों ने हिंसा की इस घटना पर चिंता जताई है.
PoK में जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के समर्थक अधिक राजनीतिक प्रतिनिधित्व और खाद्य वस्तुओं की कमी जैसी आर्थिक दिक्कतों के समाधान की मांग कर रहे हैं. AFP की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने सरकारी चेतावनियों को नजरअंदाज करते हुए इस हफ्ते मुजफ्फाराबाद की ओर मार्च करने का आह्वान किया था. लेकिन मार्च से पहले हुए विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गए.
मानवाधिकार संगठनों ने पीओके में प्रदर्शनकारियों से निपटने के लिए पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा आंसू गैस और जानलेवा ताकत के इस्तेमाल की निंदा की है.
पाकिस्तान के कब्जे वाले पुंछ जिले के शीर्ष नागरिक अधिकारी सरदार वहीद ने AFP को बताया, "मंगलवार को हुई हिंसा में सात आम नागरिक, एक पैरामिलिट्री का जवान और एक पुलिस ऑफिसर मारे गए." पुंछ जिले में ही विरोध प्रदर्शन बहुत ज्यादा हो रहे हैं. वहीद ने कहा, "अगर प्रदर्शनकारी राजधानी की ओर बढ़ने की कोशिश करेंगे तो अधिकारी मार्च रोक देंगे."
AFP के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, जून में स्थानीय सरकार ने आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत JAAC पर बैन लगा दिया था, जिसके बाद से अशांति और बढ़ गई. इससे प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं, जिसमें 22 लोग मारे गए.
JAAC ने आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत प्रतिबंध को खारिज कर दिया है और कहा है कि ज्यादा आर्थिक और राजनीतिक अधिकारों की उनकी मांग जायज है. बैन किए गए ग्रुप के सैकड़ों समर्थकों को गिरफ्तार किए जाने के बावजूद प्रदर्शन जारी हैं.
मीरवाइज ने मौतों पर दुख जताया
जम्मू-कश्मीर में इस घटनाक्रम पर चिंता जताई जा रही है. मीरवाइज (मुख्य उपदेशक) उमर फारूक ने एक्स पोस्ट में कहा कि वह "नागरिकों और पुलिस कर्मियों की मौत की खबरों से बहुत चिंचित और दुखी हैं." उन्होंने कहा, "मेरी दुआएं पीड़ित परिवारों और इन दुखद घटनाओं से प्रभावित सभी लोगों के साथ हैं."
मीरवाइज ने पाकिस्तान से बातचीत को प्राथमिकता देने की अपील की और प्रदर्शनकारी संगठनों से "जिम्मेदारी" निभाने को कहा. उन्होंने कहा, "मेरे परिवार का जम्मू-कश्मीर के समुदायों के सामाजिक, शैक्षणिक, धार्मिक और राजनीतिक विकास के साथ पुराना ऐतिहासिक जुड़ाव रहा है, जिसमें LOC के दूसरी तरफ के समुदाय भी शामिल हैं."
उन्होंने कहा, "मैं पाकिस्तान सरकार और वहां की स्थानीय सरकार से बातचीत, संयम और जुड़ाव को प्राथमिकता देने, टकराव के बजाय परामर्श और समायोजन के जरिये मतभेदों को हल करने, मानवाधिकारों के सम्मान और मानव जीवन की पवित्रता को सर्वोपरि रखने का आग्रह करता हूं."
JAAC की एक मुख्य मांग स्थानीय विधानसभा में 12 सीटें हटाना है, जो कश्मीर के बाहर रहने वाले शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं. JAAC ने कहा कि इन सीटों का इस्तेमाल पाकिस्तान की राजनीतिक पार्टियां क्षेत्रीय चुनाव को प्रभावित करने के लिए करती हैं, जिससे चुनाव के नतीजों पर असर पड़ता है. क्षेत्रीय चुनाव जुलाई में होने हैं.
BJP ने भी चिंता जताई
भारतीय जनता पार्टी की जम्मू-कश्मीर इकाई ने भी पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में बढ़ते मानवीय संकट की खबरों पर चिंता जताई और आम लोगों के खिलाफ बल प्रयोग को तुरंत रोकने की मांग की. बीजेपी ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करने की भी मांग की.
बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता मंजूर भट और दानिश भट ने कहा कि महिलाओं और बच्चों सहित शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग की परेशान करने वाली खबरें इस क्षेत्र में मानवाधिकारों की स्थिति में गंभीर गिरावट को दिखाती हैं. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और वैश्विक मानवाधिकार संगठनों से कथित उल्लंघनों पर संज्ञान लेने और इस क्षेत्र में पाकिस्तान के मानवाधिकार रिकॉर्ड के लिए उसे जिम्मेदार ठहराने का आग्रह किया, जहां तनाव अभी भी बहुत अधिक है.
AFP ने बताया कि प्रदर्शनकारियों के सड़क जाम करने के कारण बुधवार को पुंछ में अधिकांश दुकानें बंद रहीं और सार्वजनिक परिवहन ठप रहा.